सीमांत माणा में ‘स्व. लता मंगेशकर व अन्य मूर्ति स्थापना का विरोध शुरू
देहरादून। उत्तराखंड के सीमांत व भारत के प्रथम गाँव ‘माणा’ (चमोली) में स्थित पौराणिक माँ सरस्वती उद्गम स्थल मंदिर परिसर में कथित अवैध निर्माण, सनातन मर्यादा विरोधी मानव-मूर्तियों (मृत व्यक्तियों की प्रतिमाओं) की स्थापना और भूमि के अतिक्रमण को लेकर विवाद अब अंतिम चरण में पहुँच गया है।
‘भैरव सेना संगठन’ ने इस संबंध में जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से उत्तराखंड शासन को एक ज्ञापन सौंपा है।
संगठन ने साफ किया है कि पिछले 4 वर्षों से लगातार की जा रही प्रशासनिक उपेक्षा के बाद अब 23 जून से पूरे प्रदेश में एक अभूतपूर्व, निर्णायक और ऐतिहासिक जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा।
भैरव सेना संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने विधिक और प्रशासनिक साक्ष्यों को सामने रखते हुए बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI-2005) के तहत राजस्व उप-निरीक्षक, पाण्डुकेश्वर (तहसील ज्योतिर्मठ) द्वारा प्रेषित खतौनी से प्रमाणित हो चुका है कि उक्त मंदिर जिस भूमि पर है, वह ‘नॉन जेेड.ए.’ (श्रेणी 10-4) के अंतर्गत पूर्ण रूप से राज्य सरकार की अकृषित चट्टानी भूमि है। इस संवेदनशील सीमांत क्षेत्र में बिना किसी सक्षम विधिक स्वीकृति या शासनादेश के लगभग ₹29 करोड़ (मौखिक) की भारी-भरकम लागत से अनाधिकृत निर्माण किया गया है।
साथ ही थाना श्री बद्रीनाथ की आधिकारिक पुलिस जाँच रिपोर्ट (जाँचकर्ता: उ०नि० अश्वनी बलूनी) में यह स्वीकार किया गया है कि मंदिर के मुख्य गर्भगृह के अंदर फर्श पर बाईं और दाईं ओर विश्वनाथ कराड की मृतक बहन (स्व. प्रयाग अक्का), स्व. लता मंगेशकर तथा अन्य मानव-आकृतियों की मूर्तियां अवैध रूप से स्थापित की गई हैं।
शास्त्रों के अनुसार, आराध्य देवी-देवताओं के गर्भगृह में पितरों या मनुष्यों को स्थान देना अक्षम्य धार्मिक अपराध और सनातन मर्यादा का खुला उल्लंघन है। संगठन के प्रदेश संगठन मंत्री गणेश जोशी ने स्पष्ट किया कि भैरव सेना पिछले चार वर्षों (2022 से 2026) से इस कुकृत्य के खिलाफ पूरी तरह संवैधानिक, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे है।
संगठन द्वारा अब तक शासन-प्रशासन को दर्जनों ज्ञापन दिए जा चुके हैं, दर्जनों बार पुतला दहन किया गया है, और ऋषिकेश, देहरादून व श्रीनगर सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में विशाल रैलियाँ, जनजागरण व आक्रोश प्रदर्शन किए जा चुके हैं।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष युवा मोर्चा मयंक मलेठा, जिला सचिव मनीष कुमार, संयोजक चन्दन शर्मा, गौरी कोठियाल, राजकुमार, राहुल सूद सहित दर्जनों सदस्य उपस्थित रहे। इस आंदोलन को अन्य राष्ट्रवादी और धार्मिक संगठनों का भी खुला समर्थन प्राप्त हुआ है, जिसमें भारतीय किसान यूनियन एकता के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र दत्त शर्मा, हिन्दू रक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा और राज्य आंदोलनकारी मनोज ध्यानी ने अपनी सहभागिता दर्ज कराते हुए कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकल्प लिया है।
कार्यक्रम का समापन करते हुये जिलाध्यक्ष अनिल कुमार ने कहा कि हमारी सनातन धर्म में शास्त्र सम्मत विरोधाभाषा उचित है और देवभूमि की कानून-व्यवस्था को बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।

